मेरी जात का आईएएस
मेरा दोस्त कल्लन मिला कल शाम,
उलझा हुआ और परेशान,
जब मैंने पूछा परेशानी का सबब,
वो बोला, “तुम्हें मतलब”
फिर मैंने थोड़ा प्यार से टटोला,
तब झिझकते हुए बोला,
कल यूपीएसएसी का रिजल्ट हैं आया,
मैं चौंका, क्यूंकी समझ नहीं पाया,
तेरा तो नहीं है किताबों से दूर का भी कोई नाता,
तू क्यों परेशान हैं?
चाहे रिजल्ट ना भी आता,
क्या कोई बेटा कम्पीटीशन में था?
क्या उसका रिजल्ट ठीक नहीं रहा?
बोला, बेटों ने तो पिछले साल ही पढ़ना छोड़ दिया था,
और बेटी का अण्डर ऐज में ब्याह कर दिया था,
चिन्ता इस बात की है मेरी जात के कितने बच्चे हुए पास,
ये डाटा नहीं लग रहा है हाथ,
उसकी परेशानी देख मैंने सोचा एक हल,
यूपीएससी में एक आरटीआई डालूंगा कल,
कि गरीब लाचार जनता लगाए बैठी है आस,
लिस्ट डाल दो भैया कि कौनसी जात के कितने हुए पास?
आखिर कल्लन के दोनों लौंडों को भी तो गोरवान्वित होना है,
कल रात से पहले स्टेटस पे अपनी जाति के आइएएस की लिस्ट डालके ही सोना है।
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